سُورَةُ الضحى

सूरह Ad-Duha

मक्की11 आयतेंपारा 30
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

وَٱلضُّحَىٰ ۝١

कस़म है धूप चढ़ने के समय की!

وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ ۝٢

और क़सम है रात की, जब वह छा जाए।

مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ ۝٣

(ऐ नबी!) तेरे पालनहार ने तुझे न तो छोड़ा और न नाराज़ हुआ।

وَلَلْـَٔاخِرَةُ خَيْرٌ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ ۝٤

और निश्चित रूप से आख़िरत आपके लिए दुनिया से बेहतर है।

وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ ۝٥

और निश्चय तेरा पालनहार तुझे प्रदान करेगा, तो तू प्रसन्न हो जाएगा।

أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًا فَـَٔاوَىٰ ۝٦

क्या उसने आपको अनाथ पाकर शरण नहीं दी?

وَوَجَدَكَ ضَآلًّا فَهَدَىٰ ۝٧

और आपको मार्ग से अनभिज्ञ पाया, तो सीधा मार्ग दिखाया।

وَوَجَدَكَ عَآئِلًا فَأَغْنَىٰ ۝٨

और उसने आपको निर्धन पाया, तो संपन्न कर दिया।

فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ ۝٩

अतः आप अनाथ पर कठोरता न दिखाएँ।

وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ ۝١٠

और माँगने वाले को न झिड़कें।

وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ ۝١١

और अपने रब के उपकार का वर्णन करते रहें।

Azizul Haq Al-Omari · English

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